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मीडिया से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा

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प्रधान मंत्री मोदी द्वारा देश में काले धन को बाहर निकालने और उस पर रोक लगाने के लिए ५०० और एक हज़ार के पुराने नोट पर प्रतिबन्ध लगाने से देश भर में मचे हलचल से आम जनता सहित केंद्र सरकार भी चिंतित है और इसीलिए स्तिथि में तेजी से सुधार लाने के लिए नित नए नियम और घोषणाएं की जा रही है l वर्तमान में देश एक प्रकार से नकारात्मक दौर से गुजर रहा है , राजनितिक दल और उसके नेता मोदी सरकार पर आरोप ,प्रत्यारोप लगाते नहीं थक रहे है . इन्तहा तो इस हद तक है की ये नेता व्यक्तिगत दुराग्रह से ग्रसित होकर एक दूसरे की व्यक्तिगत बातों को भी सार्वजनिक कर रहे है . जो किसी भी नेता , पार्टी और देश के लिए अच्छा नहीं है . ऐसे संकट के समय में भारत जैसे देश में चौथा स्तम्भ समझे जाने वाले मीडिया को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए. देश की अर्थव्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए और देश को काले धन और भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाये गए इस ऐतिहासिक कदम का आम जनता ने जहाँ एक तरफ स्वागत किया है वही दूसरी तरफ उन्हें हो रही परेशानियों को भी सहज ही समझा जा सकता है . रोज की स्तिथि पर सरकार भी इसी लिए लगातार नजर बनाये हुए है . लेकिन दुःख की बात है की देश के कुछ मीडिया और पत्रकार इस फैसले के अच्छे पहलु को दिखाने के स्थान पर उसके नकारात्मक पक्ष को ज्यादा तबज़्ज़ो दे रहे है . जिससे जनता के बीच भ्रम और आशंका की स्तिथि उत्पन्न हो रही है .
किसी भी लोकतान्त्रिक देश के आर्थिक , सामाजिक या राजनितिक परिवर्तन में उस देश के चौथे स्तम्भ यानि मीडिया की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है। यदि हम गौर करें तो देश के स्वंतंत्रता के आंदोलन में भी मीडिया की भूमिका रही है। उस समय के अनेक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ता , साहित्यकारों ने पत्र पत्रिकाओं के जरिये जनमानस के अंदर देश प्रेम की भावना जागृत करने , स्वतंत्रता का अलख जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। लेकिन वर्तमान में कुछ इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के लोग पार्टी विशेष या व्यक्ति विशेष पर आधारित प्रचार प्रसार में जुट कर मीडिया की गरिमा को धूमिल कर रहे है जो किसी भी देश के राजनितिक,सामाजिक या आर्थिक विकास के लिए अच्छे संकेत नहीं है। ५०० और हज़ार के नोट बंद होने से एक ही झटके में काला धन समाप्त सा हो गया है , देश की अर्थव्यवस्था पर निश्चित रूप से इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा . इतने बड़े फैसले में शरुआती परेशानिया आ रही है पर आने वाले दिनों में ये निर्णय सभी के लिए सुखद होगा . मीडिया को इस बात को जनता के बीच प्रमुखता से प्रस्तुत करना चाहिए जिससे उनके मन में आरंभिक परेशानियों को सहने का साहस बढे . इसमें दो राय नहीं की केंद्र सरकार को काले धन के खिलाफ अपने इस अभियान को अंजाम तक पहुचाने के लिए अभी कुछ और कड़े कदम उठाने पड़ सकते है.
ऐसे समय में ये बहुत आवश्यक है कि मीडिया अपनी सकारात्मक भूमिका निभाये चाहे वो प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। मीडिया को अपनी “टी आर पी” की चिंता किये बगैर केंद्र सरकार के इस अभियान को उसकी मंजिल तक पहुचाने में सहयोग देना चाहिए जिससे देश की अर्थव्यवस्था की उसके मुकाम तक पहुचाने की सरकार की मंशा पूरी हो सके . वैसे भी कहा जाता है की मीडिया की ताकत का कोई मुकाबला नहीं है। मीडिया की ताकत ने देशों के तख्ते पलट दिए है, अनेक आंदोलनों को उनके मुकाम तक पहुचाया है। अनेक सरकारी योजनाओं को सफल बनाया है। अब समय आ गया है की मीडिया अपनी उस ताकत को पहचाने और देश और समाज को सही सोच के साथ सकारत्मक दिशा में आगे ले जाए।

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