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समाजवादी सिद्धांत का कड़वा सच

Posted On: 27 Jul, 2015 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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पिछले दिनों निलंबित आई जी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ कार्यवाही तेज हुई है . अपने प्रदेश की स्तिथि बड़ी ही अजीब है , ऐसा लगता है की यहाँ पर झूठो और बेईमानो का बोलबाला है और ईमानदार और सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों की डगर बहुत ही कठिन है . समाजवाद का चोला पहने प्रदेश की सरकार में शामिल लगभग हर दूसरा मंत्री किसी न किसी आपराधिक मामले में संलिप्त है . समाजवादी पार्टी की स्थापना राम मनोहर लोहिया के जिस सिद्धांत पर हुई थी उसमे व्यक्ति की प्रतिष्ठा सर्वोपरि रक्खी गयी थी और उसे ही समाजवाद का स्रोत माना गया था . समाजवादी पार्टी के मुखिया ने अपने राजनितिक जीवन के शुरूआती वर्षों में लोहिआवाद का खूब मान सम्मान किया और उसे अपना कर ही सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़ते गए पर उम्र के साथ साथ समाजवाद के साथ उनका रिस्ता टूटता सा जा रहा है . यहाँ पार्टी के सदस्यों और मंत्रियों के अपराध की जाँच दूध का दूध और पानी का पानी करने के आदेश के साथ शुरू तो होती है पर कुछ ही दिनों में ये फाइलें गर्द के गुबार में गुम हो जाती है . मामला चाहे अरुण मिश्रा जैसे अधिकारी का हो या यादव सिंह जैसे जुगाड़ू अधिकारी का , प्रदेश सरकार की तथाकथित जांच किसी से छिपी नहीं है . वहीँ दूसरी तरफ जुझारू और ईमानदार अफसर दुर्गा नागपाल को अपनी इज्जत और मान सम्मान बचाने के लिए जिस तरह सरकार के सामने नतमस्तक होना पड़ा , ये प्रदेश की जनता बखूबी जानती है . एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार के हत्या के मामले में फंसे मंत्री के बचाव में प्रदेश सरकार जिस तरह सामने आई है वो देश के प्रजातंत्र और लोकतंत्र के साथ ही न्यायिक प्रक्रिया पर प्रहार के सामान ही है . इस पार्टी के कार्यकर्ताओं , सदस्यों और यहाँ तक की मंत्रियों की निरंकुशता से प्रदेश की जनता को लगभग रोज ही सामना करना पड़ता है . गाड़ी पर समाजवादी पार्टी का झंडा लगाकर लोकल नेता कहीं अपराध करते है तो कहीं कुकर्म और फिर कुछ ही दिनों इन मामलों से बरी भी हो जाते है .
वास्तव में किसी भी पार्टी में शीर्ष नेताओं के व्यवहार और आचरण का उस पार्टी के कार्यकर्ताओं पर प्रभाव पड़ता है , लेकिन समाजवादी पार्टी के उच्च नेताओं में कही न कही अनुशासन, संयम और धैर्य का अभाव रहा है, यही झलक पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थको में भी देखी जा रही है . ऊपरी सतह पर जब अनुशासन होता है तो निचली सतह अपने आप अनुशासित हो जाती है .बार बार ऐसी घटनाएं सपा सरकार के साथ साथ पार्टी के कुछेक सुधी और सज्जन नेताओं की छवि को भी धूमिल करने के लिए काफी है . प्रदेश सरकार को और उनके वरिष्ठ नेताओं को अपने कार्यकर्ताओं को संयमित रहने और सजग रहने की नसीहत देने की सख्त जरुरत है प्रदेश में अराजकता का माहौल समाप्त हो और पुलिस , प्रशासन के साथ साथ जनता भी शांति से रह सके .

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